रोज़े की फ़ज़ीलतें
The Virtues Of Fasting
(3) रोज़े की फ़ज़ीलतें बहुत बड़ी हैं, और सहीह अहादीस में जो बातें वारिद हुई हैं उनमें से एक यह है कि अल्लाह ने रोज़े को अपने लिए चुना है, वह इसका बदला देगा और उसके सवाब को बेहिसाब बढ़ाएगा, जैसा कि वह फ़रमाता है [हदीसे क़ुदसी में]: "सिवाय रोज़े के, क्योंकि वह केवल मेरे लिए है, और मैं ही उसका बदला दूँगा।" (अल-बुख़ारी, अल-फ़त्ह, हदीस संख्या 1904; सहीह अत-तरग़ीब, 1/407)। रोज़े के बराबर कोई चीज़ नहीं (अन-नसाई, 4/165; सहीह अत-तरग़ीब, 1/413), और रोज़ेदार की दुआ रद्द नहीं की जाती (अल-बैहक़ी ने रिवायत किया, 3/345; अस-सिलसिलतुस-सहीहा, 1797)। रोज़ेदार के लिए दो ख़ुशियों के पल हैं: एक जब वह इफ़्तार करता है और एक जब वह अपने रब से मिलेगा और अपने रोज़े पर ख़ुश होगा (मुस्लिम ने रिवायत किया, 2/807)। रोज़ा क़यामत के दिन किसी व्यक्ति के लिए सिफ़ारिश करेगा और कहेगा, "ऐ मेरे रब, मैंने इसे दिन में खाने और शारीरिक इच्छाओं से रोके रखा, तो मुझे इसकी सिफ़ारिश करने दे।" (अहमद ने रिवायत किया, 2/174। अल-हैसमी ने अल-मज्मा' (3/181) में इसकी सनद को हसन कहा है। यह भी देखें सहीह अत-तरग़ीब, 1/411)। रोज़ेदार के मुँह की जो महक होती है, वह अल्लाह के नज़दीक कस्तूरी की ख़ुशबू से बेहतर है (मुस्लिम, 2/807)। रोज़ा ढाल और मज़बूत क़िला है जो व्यक्ति को आग से सुरक्षित रखता है (अहमद ने रिवायत किया, 2/402; सहीह अत-तरग़ीब, 1/411; सहीह अल-जामि', 3880)। जो व्यक्ति अल्लाह की ख़ातिर एक दिन रोज़ा रखता है, अल्लाह उसके चेहरे को आग से सत्तर साल की दूरी तक हटा देगा (मुस्लिम ने रिवायत किया, 2/808)। जो व्यक्ति अल्लाह की रज़ामंदी चाहते हुए एक दिन रोज़ा रखता है, और अगर वह उसकी ज़िंदगी का आख़िरी दिन हो, तो वह जन्नत में प्रवेश करेगा (अहमद ने रिवायत किया, 5/391; सहीह अत-तरग़ीब, 1/412)। जन्नत में "अर-रय्यान" नाम का एक द्वार है, जिससे रोज़ेदार प्रवेश करेंगे, और उनके सिवा कोई उसमें प्रवेश नहीं करेगा; जब वे प्रवेश कर लेंगे तो वह बंद कर दिया जाएगा, और उसके बाद उससे कोई और प्रवेश नहीं करेगा।" (अल-बुख़ारी, अल-फ़त्ह, हदीस संख्या 1797)।