22 संविधान: न्यायपालिका (क़ज़ा)
22 Constitution: JUDICIARY (QADAAA)
अनुच्छेद 66।
Article 66.
न्यायपालिका (क़ज़ा) का अर्थ है बाध्यकारी रूप से फ़ैसला सुनाना। यह लोगों के बीच के झगड़ों का निपटारा करती है, उस चीज़ को रोकती है जो समुदाय के अधिकारों को हानि पहुँचाती है, और लोगों तथा शासन-तंत्र के सदस्यों - शासकों और कर्मचारियों, जिनमें ख़लीफ़ा और निम्न पदों वाले लोग भी शामिल हैं - के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों को समाप्त करती है।
Judgeship is the pronouncement of the verdict in a binding way. It settles the disputes among people, prevents that which harms the community's rights and eliminates the disputes arising between people and members of the ruling apparatus - rulers and employees - including the Khaleefah and those of lesser rank.
अनुच्छेद 67।
Article 67.
ख़लीफ़ा का यह दायित्व है कि वह एक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करे, जिसे प्रशासनिक नियमों के अंतर्गत न्यायाधीशों की नियुक्ति, अनुशासनात्मक कार्रवाई और बर्ख़ास्तगी का अधिकार प्राप्त हो। मुख्य न्यायाधीश एक बालिग़ मुसलमान पुरुष होना चाहिए, जो बुद्धिमान हो, न्यायप्रिय हो और फ़क़ीह (इस्लामी विधि का विद्वान) हो। न्यायालयों के शेष कर्मचारी उस निदेशालय के अधिकार-क्षेत्र में आते हैं जो न्यायालय के कार्यों का प्रबंधन करता है।