4 पश्चिमी सभ्यता के आस्था-सिद्धांत का खंडन
4 Refuting the Creed of the Western Civilization
यूरोप में, कैथोलिक चर्च, जैसा कि पहले चर्चा की गई थी, धर्म के नाम पर जीवन, समाज, राज्य और लोगों पर प्रभुत्व जमाए हुए था। दैवी सत्ता के विचार के आधार पर उसने राजाओं और शासकों पर भी अपना प्रभुत्व फैलाया। वह उनके शासन को वैधता प्रदान करता और उसे अधिकृत करता था। इस प्रकार शासक और राजा कैथोलिक चर्च के अधीन हो जाते थे। कभी-कभी वे अपने हितों की खातिर कैथोलिक चर्च से गठबंधन भी कर लेते थे। कैथोलिक चर्च ने लोगों पर अपना प्रभुत्व इस दावे के साथ फैलाया कि उसे क्षमा का अधिकार प्राप्त है, जो पापमोचन (absolution) और संस्कार (sacrament) के माध्यम से दिया जाता है। जो कोई भी उसकी शिक्षाओं का उल्लंघन करता, उसे क्रूर धार्मिक न्यायालय (inquisition) और दंडात्मक बहिष्कार (excommunication) का सामना करना पड़ता। चर्च दशमांश (tithes) और अन्य स्रोतों से प्राप्त भूमि और धन के स्वामित्व के द्वारा अर्थव्यवस्था पर भी नियंत्रण रखता था। किंतु सोलहवीं शताब्दी ईस्वी की शुरुआत से उसका प्रभाव धीरे-धीरे क्षीण होने लगा। इसके कई कारण थे, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण मार्टिन लूथर के नेतृत्व में हुआ प्रोटेस्टेंट सुधार आंदोलन (Protestant Reformation) है। इस सुधार ने उस मार्ग को प्रशस्त किया जिसे पश्चिमी लोग राज्य के प्रभुत्व और धर्म के पृथक्करण का मार्ग बताते हैं। अपनी पुस्तक *The Advent of Democracy Volume 1 The Modem Revolution* (फ़्रेंच: *L'avenement de la democratie I La revolution moderne*) में मार्सेल गोशे ने कहा, "लूथर की कार्यवाही मध्यस्थता के सिद्धांत पर उसके मूल में प्रहार करती है, उस मध्यस्थता के, जिसे चर्च के रूप में, उस केंद्रीय संस्था के रूप में, जो ईसाई जगत में इसे मूर्त रूप देती थी... स्वर्ग और पृथ्वी के बीच की एकता पर जो प्रश्न वह उठाती है, वही आधुनिक युग का पहला कदम है। (फ़्रेंच: *L'operation de Luther frappe le principe de mediation au coeur, sous les traits de I'Eglise, I'institution pivot qui le materialisait dans le monde Chretien... La remise en question de I'unite du Ciel et de la Terre qu'elle engage est le premier pas de I'ere moderne.*)"