प्रेम के प्रकार
Types of love
प्रेम की चार प्रकार हैं, जिन्हें एक-दूसरे से अलग पहचानना चाहिए, और जो व्यक्ति इनके बीच अंतर नहीं कर पाता, वह निश्चय ही गुमराह हो जाता है। पहला, अल्लाह से प्रेम; अकेला यह प्रेम मनुष्य को अल्लाह की यातना से बचाने और उसके इनाम का पात्र बनाने के लिए काफ़ी नहीं है, क्योंकि मुशरिक (बहुदेववादी) और सलीब की पूजा करने वाले (ईसाई) तथा यहूदी भी अल्लाह से प्रेम का दावा करते हैं। दूसरा, जो अल्लाह को प्रिय है उससे प्रेम करना। यही वह प्रकार है जो किसी व्यक्ति को इस्लाम में दाख़िल करता है और उसे शिर्क से निकालता है। लोगों में अल्लाह के सबसे प्रिय वे हैं जो इस प्रकार के प्रेम का भली-भाँति पालन करते हैं। तीसरा, अल्लाह की ख़ातिर प्रेम करना, जो उसके प्रिय वस्तुओं से प्रेम करने की शर्तों में से एक है। चौथा, अल्लाह के सिवा दूसरों से प्रेम करना; अल्लाह से और साथ ही दूसरे बुतों से एक साथ प्रेम करना। यही मुशरिकों का प्रेम है। जो व्यक्ति अल्लाह के साथ दूसरों से प्रेम करता है, और वह भी अल्लाह की ख़ातिर नहीं, तो उसने उन्हें अल्लाह के सिवा दूसरे ख़ुदा बना लिया है। एक पाँचवाँ प्रकार भी है, जो हमारे विषय का हिस्सा नहीं है। यह मनुष्य का उन चीज़ों के लिए स्वाभाविक प्रेम है जो उसकी प्रकृति के अनुकूल हैं; जैसे प्यासे का पानी से, भूखे का भोजन से, नींद से, पत्नी और संतान से प्रेम। ये ऐसे प्रेम हैं जिनकी निंदा नहीं की जाती, जब तक कि वे मनुष्य को अल्लाह को याद करने और उससे प्रेम करने से विचलित न कर दें। अल्लाह ने फ़रमाया: (ऐ ईमान वालो! तुम्हारे माल और तुम्हारी संतान तुम्हें अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल न कर दें) और उसने यह भी फ़रमाया: (ऐसे लोग जिन्हें न व्यापार और न ख़रीद-फ़रोख़्त अल्लाह की याद से हटाती है।)2