5.9 अपनी बेटी के कान में एक फुसफुसाहट
5.9 A Whisper In His Daughter’s Ear
‘आइशा (रज़ि.) बयान करती हैं, “जब नबी ﷺ अपने बिस्तर-ए-मर्ग पर थे और उनकी सभी पत्नियाँ मौजूद थीं, तो उनकी बेटी फ़ातिमा (रज़ि.) आगे बढ़ीं, और उनकी चाल बिल्कुल वैसी ही थी जैसे अल्लाह के रसूल ﷺ चला करते थे।
‘Āishah narrates, “As the Prophet صلى الله عليه وسلم lay on his deathbed, with all of his wives present, his daughter Fāṭimah came forward, walking just as the Messenger of Allah صلى الله عليه وسلم would walk.
उन्होंने ﷺ उनका स्वागत किया और कहा, “मेरी प्यारी बेटी, स्वागत है।” फिर उन्होंने उन्हें अपने पास बिठाया और उनसे एक राज़ की बात कही, जिससे फ़ातिमा रो पड़ीं। फिर उन्होंने उनसे एक और राज़ की बात कही, जिससे वे हँस पड़ीं। मैंने उनसे पूछा कि किस बात ने उन्हें रुलाया, लेकिन उन्होंने कहा, “मैं अल्लाह के रसूल ﷺ का राज़ कभी ज़ाहिर नहीं करूँगी।” मैंने उस दिन जितनी ख़ुशी और ग़म को इतने क़रीब से देखा था, उतना पहले कभी नहीं देखा था, इसलिए जब वे रो रही थीं तो मैंने उनसे कहा, “अल्लाह के रसूल ﷺ ने तुम्हें अपनी बातों से नवाज़ा, हमें नहीं, और फिर भी तुम रो रही हो?” मैंने उनसे दोबारा पूछा कि उन्होंने क्या कहा था, लेकिन उन्होंने जवाब दिया, “मैं अल्लाह के रसूल ﷺ का राज़ कभी ज़ाहिर नहीं करूँगी।” जब नबी ﷺ का इंतिक़ाल हो गया, तो मैंने उनसे फिर पूछा, और उन्होंने बताया कि उन्होंने ﷺ उनसे कहा था, “जिब्रील हर साल एक बार मेरे साथ क़ुरआन का दौर किया करते थे, और इस साल उन्होंने मेरे साथ दो बार दौर किया। मैं इससे इसके सिवा कुछ नहीं समझता कि मेरा वक़्त आ पहुँचा है, और तुम मेरे घरवालों में सबसे पहले मुझसे आ मिलोगी।” फ़ातिमा ने कहा, “इस पर मैं रो पड़ी, तो उन्होंने ﷺ धीरे से मुझसे कहा, ‘क्या तुम इससे ख़ुश नहीं कि तुम जन्नत में मोमिनों की रानी बनोगी?’ और इसी बात ने मुझे हँसा दिया।” इमाम अन-नववी (मृत्यु 1277) बताते हैं कि यह असल में एक ही बात में दो भविष्यवाणियाँ थीं। पहली यह कि नबी ﷺ ने पहले से बता दिया था कि यह बीमारी, और इससे पहले की कोई दूसरी बीमारी नहीं, इस बात का संकेत थी कि उनका वक़्त आ गया है, और कि युवा फ़ातिमा—जो उस समय अपने बीस के आरंभिक वर्षों में थीं—उनके घरवालों में किसी और से पहले इंतिक़ाल करेंगी।