4.5 गासिब (ग़स्ब करने वाले) के बारे में फ़ैसला
4.5 The verdict on the usurper
अगर कोई गासिब (हड़पने वाला) ताक़त के ज़ोर से सत्ता पर क़ब्ज़ा कर ले, तो वह ख़लीफ़ा नहीं बनेगा, भले ही वह अपने आप को मुसलमानों का ख़लीफ़ा घोषित कर दे। इसकी वजह यह है कि इस सूरत में मुसलमानों ने उसे ख़िलाफ़त का अनुबंध नहीं दिया होगा। और अगर वह लोगों से ज़बरदस्ती और दबाव के ज़रिए बैअत ले ले, तो भी वह ख़लीफ़ा नहीं बनेगा, भले ही उसे बैअत दे दी गई हो। इसकी वजह यह है कि ज़ोर-ज़बरदस्ती से ली गई बैअत को सही नहीं माना जाता, और उसके ज़रिए ख़िलाफ़त का अनुबंध नहीं हो सकता। क्योंकि यह एक ऐसा अनुबंध है जो आपसी रज़ामंदी और इख़्तियार पर आधारित है, और इसे ज़बरदस्ती या दबाव से तय नहीं किया जा सकता। इसलिए ख़िलाफ़त केवल रज़ामंदी और अपने इख़्तियार से दी गई बैअत के ज़रिए ही तय हो सकती है। लेकिन अगर गासिब लोगों को इस बात पर क़ायल कर ले कि मुसलमानों के हित में यह है कि वे उसे बैअत दें, और शरीअत के अहकाम का लागू होना उन्हें बैअत देने पर मजबूर करता है, और वे इस बात से सहमत होकर रज़ामंदी और अपने इख़्तियार से उसे बैअत दे दें, तो वह उसी क्षण से ख़लीफ़ा बन जाएगा जब उसे रज़ामंदी और इख़्तियार से बैअत दी गई। यह हुक्म इस सूरत में भी लागू होगा, भले ही उसने शुरू में सत्ता ज़बरदस्ती और ताक़त से हासिल की हो। शर्त यह है कि बैअत दी जाए और वह आपसी रज़ामंदी और अपने इख़्तियार से हो, चाहे जिसे बैअत दी गई हो वह शासक हो या न हो।