7.5 कुरआन के संरक्षण का महत्व
7.5 Significance Of The Qur’aan’s Preservation
अल्लाह ने क़ुरआन में वादा किया है कि वह अपने अंतिम कलाम की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी स्वयं लेगा और उसे खोने से बचाएगा। उसने फ़रमाया,
Allaah promised in the Qur’aan that He would take on the responsibility of protecting His final word from loss. He said,
निश्चय ही हमने ही यह ज़िक्र (क़ुरआन) उतारा है, और निश्चय ही हम ही इसकी रक्षा करेंगे। 105
“Verily I have revealed the Reminder (Qur’aan), and verily I shall preserve it.” 105
इस प्रकार, कुरआन को मौखिक और लिखित दोनों रूपों में ऐसे संरक्षित किया गया है, जैसा इतिहास की किसी अन्य धार्मिक पुस्तक के साथ नहीं हुआ।
Thus, the Qur’aan has been preserved in both the oral as well as written form in a way no other religious book in history has.
अल्लाह ने कुरआन को क्यों सुरक्षित रखा और अपनी पिछली दिव्य किताबों को बदले जाने या खो जाने की अनुमति क्यों दी? इस प्रश्न का उत्तर निम्नलिखित तीन तथ्यों में निहित है: