प्रश्न 31: नमाज़ और ज़कात के फ़र्ज़ होने का शरई प्रमाण क्या है?
Q 31: What is the textual proof that Prayer and Zakah are compulsory?
A--- अल्लाह, सर्वशक्तिमान कहता है: {फिर यदि वे तौबा कर लें, नमाज़ क़ायम करें और ज़कात दें, तो उनका रास्ता छोड़ दो}। (अत-तौबा, 5)
A--- Allah, the Almighty says: {But if they repent and perform Prayer, and give Zakah, then leave their way free}. (At-Taubah,5)
अल्लाह कहता है: {फिर अगर वे तौबा कर लें, नमाज़ क़ायम करें और ज़कात दें, तो वे दीन में तुम्हारे भाई हैं}। (अत-तौबा, 11)
Allah says: {But if they repent, perform Prayer and give Zakah, then they are your brethren in religion}. (At-Taubah, 11)
अल्लाह कहता है: {और उन्हें इसके सिवा कोई आदेश नहीं दिया गया था कि वे अल्लाह की इबादत करें, उसी के लिए दीन को शुद्ध रखते हुए, केवल उसी एक की ओर एकाग्र होकर, और नमाज़ कायम करें और ज़कात दें} (सूरह अल-बय्यिनह, 5)