प्रश्न 39: इस बात का शास्त्रीय प्रमाण क्या है कि ईमान के स्तर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होते हैं?
Q 39: What is the textual proof that degrees of Faith vary from one person to another?
A--- अल्लाह, सर्वशक्तिमान फ़रमाता है: {और जो आगे बढ़ने वाले हैं [इस दुनिया में, इस्लाम क़बूल करने की पहली पुकार पर सबसे आगे रहने वाले], वही (जन्नत में) भी आगे होंगे। यही लोग (अल्लाह के) सबसे क़रीबी होंगे। नेमतों के बाग़ों में। उनमें से अगले लोगों में से बड़ी तादाद होगी (जिन्होंने पहले इस्लाम क़बूल किया)। और पिछले लोगों में से थोड़े होंगे। (वे) सोने और जवाहिरात से जड़े तख़्तों पर होंगे। उन पर आमने-सामने टेक लगाए बैठे होंगे। उनके इर्द-गिर्द हमेशा रहने वाले लड़के (ख़िदमत करते हुए) फिरेंगे, प्यालों, सुराहियों और बहती शराब के जामों के साथ, जिससे न उनके सिर में दर्द होगा और न वे बेहोश होंगे। और जो फल वे चुनें, और जिस परिंदे का गोश्त वे चाहें। और (वहाँ) बड़ी-बड़ी ख़ूबसूरत आँखों वाली हूरें होंगी (नेक लोगों की बीवियों के तौर पर), सुरक्षित रखे हुए मोतियों की तरह। यह उस अमल का बदला है जो वे किया करते थे। वहाँ वे कोई लग़्व (बेहूदा, झूठी, बुरी फ़ुज़ूल बातें) नहीं सुनेंगे, न कोई गुनाहभरी बात (जैसे ग़ीबत)। बस यह कहना सुनेंगे: सलाम! सलाम! (सलामती की दुआएँ)! और दाएँ हाथ वाले — दाएँ हाथ वाले कितने ख़ुशनसीब होंगे!}। (अल-वाक़िआ, 10-27)