अनुच्छेद 119
Article 119
किसी भी पुरुष या स्त्री के लिए ऐसा कोई कार्य करना वर्जित है जो नैतिकता को कमज़ोर करे या समाज में बिगाड़ पैदा करे।
It is prohibited for any man or woman to undertake any work which could undermine the morals, or causes corruption in the society.
इस लेख का प्रमाण वह है जो रफ़ी' बिन रिफ़ाअह से वर्णित है, जिन्होंने कहा।
The evidence for this article is what was narrated from Rafi’ b. Rifa’ah who said.
. وَنَ هَانَا عَنْ كَسْبِ الأَمَةِ إِلاَّ مَا عَمِلَتْ بِيَدِهَا وَقَالَ هَكَذَا بِأَصَابِعِهِ نَحْوَ الْخَ بْزِ « » وَالْغَزْلِ وَالنَّ فْشِ .
. وَنَ هَانَا عَنْ كَسْبِ الأَمَةِ إِلاَّ مَا عَمِلَتْ بِيَدِهَا وَقَالَ هَكَذَا بِأَصَابِعِهِ نَحْوَ الْخَ بْزِ « » وَالْغَزْلِ وَالنَّ فْشِ .
“नबी ﷺ ने हमें दासी से केवल वही लाभ उठाने से मना किया जो वह अपने हाथों से करती है, और उन्होंने अपनी उँगलियों से ‘इस तरह’ कहा, जैसे रोटी बनाना, सिलाई करना और लिखना।” इसे अहमद ने रिवायत किया और अल-ज़ैन ने प्रमाणित किया, तथा अल-हाकिम ने भी इसे प्रमाणित किया। दूसरे शब्दों में, उन्होंने स्त्री को ऐसे किसी भी काम से रोका जिसमें उसके स्त्रीत्व का लाभ उठाया जाए, जबकि अन्य सभी प्रकार के काम की अनुमति दी। यह उस रिवायत के भाग से समझा जाता है जिसमें “सिवाय उसके जो वह अपने हाथों से करती है” कहा गया है, अर्थात् जिसमें उसके परिश्रम से लाभ उठाने का इरादा हो, और इसका अर्थ यह है कि उसके स्त्रीत्व का लाभ उठाना निषिद्ध है। इसके अतिरिक्त, शरीअत का सिद्धांत “हराम तक ले जाने वाले साधन भी हराम हैं” ऐसे किसी भी काम को निषिद्ध ठहराता है जो किसी हराम चीज़ तक ले जा सकता हो। और शरीअत का सिद्धांत “यदि किसी जायज़ चीज़ का एक प्रकार हानि की ओर ले जाए, तो केवल वही प्रकार निषिद्ध होगा, और वह चीज़ स्वयं जायज़ ही रहेगी” हर उस व्यक्ति को, चाहे पुरुष हो या स्त्री, ऐसे काम से रोकता है जो मूल रूप से पुरुषों और स्त्रियों दोनों के लिए जायज़ हो, यदि उस व्यक्ति के लिए विशेष रूप से वह काम उसे हराम में ले जाए, या उम्मत के लिए, या समाज के लिए, चाहे वह हराम किसी भी प्रकार का क्यों न हो।