आर्टिकल 156
Article 156
राज्य की यह ज़िम्मेदारी है कि वह उस व्यक्ति के जीवन-यापन के खर्च की गारंटी दे जिसके पास न धन हो, न काम हो, और न ही कोई रिश्तेदार हो जो उसके आर्थिक भरण-पोषण का ज़िम्मेदार हो। राज्य अपंग और विकलांग लोगों के आवास और उनके भरण-पोषण का भी ज़िम्मेदार है।
The State has to guarantee the living expenses of the one who has no money, no work and no relatives responsible for his financial maintenance. The State is responsible for housing and maintaining the disabled and handicapped people.
इस लेख का प्रमाण वही है जो लेख 153 में प्रमाण के रूप में बताया गया था, जो रसूल (पीबीयूएच) के शब्द थे:
The evidence for this article is what was mentioned as evidence in article 153, which was the words of the Messenger (pbuh) :
.» مَنْ تَرَكَ مَالاً فَلِوَرَثَتِهِ، وَمَنْ تَرَكَ كَلاًّ فَإِلَيْنَا «.
.» مَنْ تَرَكَ مَالاً فَلِوَرَثَتِهِ، وَمَنْ تَرَكَ كَلاًّ فَإِلَيْنَا «.
"यदि मुसलमानों में से कोई व्यक्ति मरता है और कुछ धन छोड़ता है, तो वह धन उसके वारिसों को मिलेगा; और यदि वह आश्रित (अनाथ) छोड़ता है, तो उनकी देखभाल हम करेंगे।" (अबू हुरैरा से, जिस पर सहमति है), और "कल्ल" वह कमज़ोर है जो निर्बल, असहाय, असमर्थ और शारीरिक रूप से अपंग लोगों को समेटता है। और रसूल ﷺ के शब्द: