अनुच्छेद 16
Article 16
शासन की व्यवस्था एक एकात्मक (यूनिटरी) व्यवस्था है, न कि एक संघीय (फेडरल) व्यवस्था।
The system of ruling is a unitary system and not a federal system.
केवल एकात्मक (unitary) शासन-व्यवस्था ही शासन के लिए सही और स्वीकार्य व्यवस्था है, इसके अलावा कोई और व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है। इसका कारण यह है कि शरीयत के प्रमाणों ने केवल इसी को पेश किया है और इसके सिवा हर व्यवस्था को निषिद्ध ठहराया है; यह 'अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन अल-आस से रिवायत है कि उन्होंने अल्लाह के रसूल ﷺ को फ़रमाते हुए सुना।
The only correct system for ruling is the unitary system and nothing else is acceptable. This is because the Shari’ah evidence brought it alone and prohibited anything else; it was narrated by ‘Abd Allah b. Amr b. Al-‘As that he heard the Messenger of Allah (pbuh) say.
. وَمَنْ بَايَعَ إِمَامًا فَأَعْطَاهُ صَفْقَةَ يَدِهِ وَثَمَرَةَ قَ لْبِهِ فَ لْ يُطِعْهُ إِنِ اسْتَطَاعَ، فَإِنْ جَاءَ « » آخَرُ ي نَُازِعُهُ فَاضْرِبُوا عُنُقَ الآخَرِ.
. وَمَنْ بَايَعَ إِمَامًا فَأَعْطَاهُ صَفْقَةَ يَدِهِ وَثَمَرَةَ قَ لْبِهِ فَ لْ يُطِعْهُ إِنِ اسْتَطَاعَ، فَإِنْ جَاءَ « » آخَرُ ي نَُازِعُهُ فَاضْرِبُوا عُنُقَ الآخَرِ.
"जो व्यक्ति किसी ख़लीफ़ा के प्रति निष्ठा की शपथ लेता है, उसे चाहिए कि वह उसे अपने हाथ का वादा और अपने दिल की सच्चाई दे (अर्थात् बाहरी और भीतरी दोनों रूप से उसके अधीन हो)। उसे अपनी पूरी क्षमता के अनुसार उसकी आज्ञा का पालन करना चाहिए। यदि कोई दूसरा व्यक्ति आगे आए (ख़िलाफ़त के दावेदार के रूप में) और उसके अधिकार को चुनौती दे, तो (मुसलमानों को) उस दूसरे की गर्दन उड़ा देनी चाहिए।" (मुस्लिम द्वारा वर्णित)। और अबू सईद अल-ख़ुदरी से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया।