अनुच्छेद 29
Article 29
यह शर्त रखी गई है कि जो क्षेत्र या देश ख़लीफ़ा को अनुबंधात्मक बैअत देता है, उसका अधिकार केवल मुसलमानों पर निर्भर और स्वायत्त होगा, किसी भी काफ़िर राज्य पर नहीं; इसके अलावा उस देश में मुसलमानों की सुरक्षा, आंतरिक और बाहरी दोनों, इस्लाम की सुरक्षा से होगी, कुफ़्र की सुरक्षा से नहीं। दूसरे देशों से ली गई आज्ञापालन की बैअत के संबंध में ऐसी शर्तें नहीं हैं।
It is stipulated that the authority of the region or the country that gives the Khalifah a contracting pledge is autonomous dependent upon the Muslims alone, and not upon any disbelieving state; besides the security of the Muslims in that country, both internally and externally, is by the security of Islam not the security of the disbelief. With respect to the pledge of obedience taken from other countries, there are not such conditions.
प्रमाण यह है कि काफ़िरों का मुसलमानों पर अधिकार (सत्ता) रखना हराम है, उसके आधार पर जो अल्लाह (سبحانه وتعالى) ने फ़रमाया: {وَلَن يَجْعَلَ اللَّهُ لِلْكَافِرِينَ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ سَبِيلًا} (सूरह अन-निसा 4:141)। अतः यदि इस्लामी भूमि के किसी भी हिस्से में मुसलमानों पर काफ़िरों का अधिकार मौजूद है, तो वह भूमि ख़िलाफ़त स्थापित करने के योग्य नहीं होगी, क्योंकि ख़िलाफ़त की स्थापना वास्तव में एक अधिकार (सत्ता) की ही स्थापना है। चूँकि उस भूमि के पास अधिकार नहीं है, इसलिए वह उसे दे भी नहीं सकती। साथ ही उसका अधिकार कुफ़्र का अधिकार है, और ख़िलाफ़त कुफ़्र के अधिकार के साथ स्थापित नहीं होती।