अनुच्छेद 169
Article 169
यह पूरी तरह से निषिद्ध है कि बैंक खोले जाएँ, और केवल राज्य बैंक ही अनुमत होगा, और ब्याज पर कोई लेन-देन नहीं होगा। इसे बैतुल-माल के एक विशेष विभाग द्वारा संभाला जाएगा। वित्तीय ऋण शरीयत के नियमों के अनुसार दिए जाएँगे, और वित्तीय तथा मुद्रा संबंधी लेन-देन को सुगम बनाया जाएगा।
It is completely prohibited to open banks, and the only one permitted will be the State bank, and there are no transactions upon interest. This will be dealt with by a particular department of the Bayt Al-Mal. Financial loans will be undertaken in accordance with the rules of the Shari’ah and the financial and currency transactions will be facilitated.
बैंक का कार्य तीन प्रकार का होता है: ब्याज आधारित लेन-देन, जैसे बॉन्ड और ऋण, और हस्तांतरण लेन-देन, जैसे चेक और जमा।
The work of the bank falls under three types: interest based transactions such as bonds and credits, transferral transactions such as cheques and deposits.
लेन-देन के हस्तांतरण (transferral transactions) और जमा (deposits), दोनों शरीयत के अनुसार जायज़ हैं, और इसका प्रमाण हस्तांतरण (हवाला/ट्रांसफर) के प्रमाणों और अमानत (ट्रस्ट) के प्रमाणों में है। अतः एक मुसलमान के लिए ऐसा बैंक खोलना जायज़ है जो हस्तांतरण लेन-देन, जमा की सेवाएँ, और उनके समान अन्य सेवाएँ, जो शरीयत द्वारा जायज़ हैं, जैसे मुद्रा (currency) के लेन-देन, प्रदान करे। ऐसी स्थिति में बैंक खोलना हराम नहीं माना जाएगा, क्योंकि केवल वह बैंक हराम है जो ब्याज (interest) पर काम करता है। लेकिन ये लेन-देन बड़े मुनाफ़े नहीं देते, या इनका मुनाफ़ा केवल मुद्रा-विनिमय करने वालों की दुकानों जैसी किसी चीज़ की स्थापना में ही सहायक हो सकता है। ऐसे पैसे से कोई भी व्यक्ति बैंक नहीं खोल सकता, क्योंकि उसमें इतना मुनाफ़ा कमाने की क्षमता नहीं है। हस्तांतरण, जमा और मुद्रा-विनिमय के लेन-देन से होने वाला लाभ ब्याज से होने वाले लाभ की तुलना में बहुत छोटा है, जबकि बड़े लाभ वे हैं जो ब्याज-आधारित लेन-देन में निवेश से प्राप्त होते हैं, और यही लाभदायक निवेश हैं। इस प्रकार हस्तांतरण, जमा और मुद्रा-विनिमय के लेन-देन से प्राप्त लाभ आज दुनिया में जिस अर्थ में बैंक जाने जाते हैं, उस तरह के बैंक खोलने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि वे केवल सीमित सेवाओं वाली दुकानें खोलने के लिए पर्याप्त होंगे, जैसे मुद्रा-व्यापारियों की दुकानें, जो आज के बैंकों पर लागू नहीं होतीं। बैंकों का खुलना ब्याज-आधारित लेन-देन के बिना संभव नहीं, और बैंक केवल ब्याज-आधारित लेन-देन के लिए ही खोला जाता है, और ब्याज क़ुरआन के स्पष्ट पाठ के अनुसार हराम (निषिद्ध) है: