अनुच्छेद 59
Article 59
गवर्नर को बर्ख़ास्त किया जा सकता है यदि ख़लीफ़ा ऐसा फ़ैसला करे, या यदि शूरा परिषद उससे असंतुष्टि व्यक्त करे - चाहे वह असंतुष्टि उचित हो या अनुचित - या यदि प्रांतीय परिषद ने उससे असंतोष व्यक्त किया हो। तथापि, गवर्नर को केवल ख़लीफ़ा ही पद से हटा सकता है।
The governor can be discharged if the Khalifah decides so or if the Shura council expresses dissatisfaction with him - whether justified or not - or if the provincial council expressed discontent with him. However, the governor can only be dismissed by the Khalifah.
इसका प्रमाण स्वयं रसूल ﷺ का कर्म है: उन्होंने मुआज़ बिन जबल को यमन का गवर्नर नियुक्त किया, फिर बिना किसी कारण के उन्हें उस पद से हटा दिया, और अल-'अला' बिन अल-हज़रमी को, जो बहरीन में उनके 'आमिल थे, इसलिए हटा दिया क्योंकि 'अब्द क़ैस के प्रतिनिधिमंडल ने उनकी शिकायत की थी। उमर बिन अल-ख़त्ताब (रज़ि.) भी गवर्नरों को कारण के साथ या बिना कारण हटाया करते थे; उन्होंने ज़ियाद बिन अबी सुफ़यान को हटाया और कोई कारण नहीं बताया, और सा'द बिन अबी वक़्क़ास (रज़ि.) को इसलिए हटाया क्योंकि लोगों ने उनकी शिकायत की थी, और कहा: "मैंने उन्हें अक्षमता के कारण नहीं हटाया, न ही विश्वासघात के कारण।" इससे यह संकेत मिलता है कि ख़लीफ़ा जब चाहे गवर्नरों को हटा सकता है, और यदि प्रांतीय परिषद उनकी शिकायत करे तो उस पर उन्हें हटाना आवश्यक है। और उनके प्रांत के लोगों के समान ही शूरा परिषद (शूरा और जवाबदेही की परिषद) है, जो सभी प्रांतों का प्रतिनिधित्व करती है।