अनुच्छेद 44
Article 44
तफ़वीद (प्रतिनिधि-सहायक को अधिकार सौंपना) के सहायक को अधिकार देने की एक शर्त यह है कि उसका अधिकार दो बातों को समेटे: पहली, सामान्य ज़िम्मेदारी, और दूसरी, प्रतिनिधित्व। इसलिए ज़रूरी है कि ख़लीफ़ा उससे कहे, "मैं तुम्हें अपनी ओर से अपना प्रतिनिधि नियुक्त करता हूँ", या कोई ऐसा शब्द जिसका अर्थ इसके समान हो और जो सामान्य ज़िम्मेदारी और प्रतिनिधित्व दोनों को समेटे। यह अधिकार-पत्र ख़लीफ़ा को यह अधिकार देता है कि वह सहायकों को विशेष स्थानों पर भेज सके, या आवश्यकता अनुसार उन्हें दूसरे स्थानों और दूसरे कार्यों पर स्थानांतरित कर सके, ख़लीफ़ा के सहायक के रूप में, और इसके लिए नए अधिकार-पत्र की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यह सब मूल अधिकार-पत्र के अंतर्गत आता है।
It is a condition for the empowering of a delegated assistant (Tafwid), that his empowerment encompasses two issues: The first being general responsibility, and the second being the representation. Accordingly, it is necessary for the Khalifah to say to him “I appoint you on my behalf as my deputy” or anything that is of a similar meaning from the wordings that encompass the general responsibility and representation. This authorisation enables the Khalifah to send the assistants to specific locations, or transfer them to other places and other work as is required as the assistant of the Khalifah, and without the need for a new authorisation since it all falls under the original empowerment.
इसका प्रमाण सहायक (वज़ीर) की वास्तविक कार्यप्रणाली है, क्योंकि तफ़वीज़ का वज़ीर, या तफ़वीज़ का सहायक, वह मंत्री है जिसे ख़लीफ़ा शासन और सत्ता की ज़िम्मेदारी उसके साथ उठाने के लिए नियुक्त करता है। उसे अपनी राय के अनुसार मामलों का प्रबंधन करने और शरीअत के नियमों के अनुरूप अपने इज्तिहाद के अनुसार उन्हें संचालित करने का अधिकार होता है, और इसलिए ख़लीफ़ा उसे सामान्य प्रबंधन और प्रतिनिधित्व का अधिकार देता है। यहाँ प्रतिनिधित्व एक अनुबंध है, और अनुबंध तब तक सही नहीं होते जब तक वे स्पष्ट शब्दों में न किए गए हों। इसी कारण यह शर्त रखी गई है कि सहायक को अधिकार देना ऐसे शब्दों के साथ होना चाहिए जो दर्शाएँ कि वह ख़लीफ़ा के स्थान पर प्रतिनिधि है और उसे सामान्य नियंत्रण प्राप्त है। जैसे ख़लीफ़ा कहे, "मैंने तुम्हें वह सब सौंपा जो मेरे ऊपर है, ताकि तुम मेरी ओर से कार्य करो", या कहे, "मैंने तुम्हें मंत्री बनाया और तुम्हारे प्रतिनिधित्व का निर्णय लिया", या इसी प्रकार का कोई और वाक्य। अर्थात् उसमें सामान्य प्रतिनिधित्व और सामान्य नियंत्रण, किसी भी तरीके से समझे जाने योग्य रूप में, शामिल होना चाहिए। अतः सहायक का अधिकार ऐसे शब्दों पर आधारित होना अनिवार्य है जो सहायक की वास्तविकता को दर्शाएँ, यानी वह ख़लीफ़ा का प्रतिनिधि है, और ख़लीफ़ा के पास जितने अनिवार्य अधिकार हैं, वह सब अपने में समेटता है। दूसरे शब्दों में, सहायक से मंत्रालय का अनुबंध ऐसे शब्दों पर होना अनिवार्य है जिनमें ये दो शर्तें शामिल हों: पहली, सामान्य नियंत्रण, और दूसरी, प्रतिनिधित्व। यदि शब्द इन दोनों शर्तों को स्पष्ट रूप से शामिल न करें, तो सहायक का मंत्रालय अनुबंधित नहीं माना जाएगा।