40. निषेधात्मक (अल-मनाय)
40. The Prohibitive ( Al Manay)
निषेधक (मानिअ) दो प्रकार का हो सकता है: हुक्म का निषेधक या सबब (कारण) का निषेधक। जहाँ तक हुक्म के निषेधक की बात है, यह एक स्पष्ट और निर्दिष्ट गुण है जिसका अस्तित्व उस बात के विपरीत को अनिवार्य करता है जो हुक्म अनिवार्य करता है, जैसे जानबूझकर किया गया हत्या का अपराध; यह उस बेटे के लिए निषेधक है जिसने अपने पिता की विरासत से हिस्सा पाने के लिए उनकी हत्या की।
The prohibitive can be a prohibitive (mani’) of the rule (hukm) or a prohibitive of the cause (sabab). As for the prohibitive of the rule, it is an apparent specified quality whose existence necessitates the opposite of what the rule necessitates, like the deliberately offensive killing; it is a mani’ for the son who killed from the inheritance of his father.
जहाँ तक सबब का मानि' (रोक) का सवाल है, वह एक स्पष्ट और निर्धारित गुण है जिसका अस्तित्व उस चीज़ के विपरीत को अनिवार्य करता है जिसे सबब अनिवार्य करता है, जैसे कर्ज़ का होना। यह ज़कात के वाजिब होने का मानि' है उस व्यक्ति के लिए जिसके पास निसाब हो और उस पर हौल (वर्ष) बीत गया हो, क्योंकि कर्ज़ निसाब के शेष रहने से रोक है, जो पूर्ण सबब है। अतः निसाब (ज़कात का सबब) हौल (वर्ष) बीतने से ज़कात के वाजिब होने को अनिवार्य करता है, और कर्ज़, जो सबब का मानि' है, वह बड़ा कर्ज़ है कि जब वह मौजूद हो तो निसाब घट जाता है।