उसूल उल-फ़िक़्ह के इल्म का इतिहास
History of the ‘Ilm of Usool ul-Fiqh
1) अल्लाह तआला ने मानवजाति के लिए, संपूर्ण रूप से, इस्लाम के साथ रसूल मुहम्मद ﷺ को भेजा। इसलिए उन्होंने अरबों से शुरुआत की, क्योंकि अल-क़ुरआन अल-करीम उन्हीं की भाषा में उतारा गया था। इसका अवतरण उस युग में हुआ जब अरबी भाषा अपने चरम पर थी, और वास्तव में इस भाषा का स्वर्णयुग था। यह वह समय था जब अरब क़बीलों ने विशेष कला-बाज़ार स्थापित कर लिए थे, ताकि वे अपनी कविता प्रस्तुत कर सकें और अपनी कुशलता तथा पराक्रम में एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
1) Allah Ta’Aalaa sent the Messenger Muhammad (saw) with Islaam to mankind in its entirety. So he began with the Arabs whilst the Qur’aan Al-Kareem had been revealed in their language. Its revelation came in the age when the Arabic language was at is ripest and indeed in the golden age of this language. This was at a time when the Arab tribes had established special arts markets so that they could present their poetry and compete with one another in respect to their skills and prowess.
अरब लोग क़ुरआन और हदीस को इसलिए समझ लेते थे क्योंकि जिस भाषा में आयतें और हदीसें आईं, वह उनकी एक स्वाभाविक प्रतिभा, स्वभाव और जन्मजात प्रवृत्ति थी जिससे वे संपन्न थे। वे उसके शब्दों के अर्थों को पूरी तरह ग्रहण कर सकते थे और उसकी शैलियों को समझते थे। परिणामस्वरूप उनमें से हर एक बिना किसी कठिनाई के वह हुक्म-ए-शरई ले लेता था जिसकी उसे आवश्यकता होती थी।