अमानत की चीज़ पर कोई दायित्व नहीं है (अद-दारक़ुतनी)।
There Is No Liability Upon The Thing That Has Been Entrusted (Ad-Daaruqutniy).
यह उन सभी को शामिल करता है जिन्हें अमानत सौंपी गई हो, चाहे वह कोई निजी नौकर (मज़दूर) हो या सरकारी नौकर (मज़दूर)। इसलिए दलील (दलील) को छोड़कर इस्तिहसान के ज़रिए फ़ैसला करना, हवा-ए-नफ़्स (ख़्वाहिश या मनमानी) के आधार पर फ़ैसला करना है, और उस मस्लहत (हित) के आधार पर फ़ैसला करना है जिसे दिमाग़ ने मस्लहत समझ लिया हो।
This covers and includes everyone who has been entrusted whether he was a private hired hand or a public hired hand. As such abandoning the Daleel and then passing judgment by way of Istihsaan reflects passing judgment based on Hawaa (a desire of whim) and by what the mind has viewed to represent a Maslahah (interest).
इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि जिसे "ज़रूरत" (दरूरह) और "मस्लहत" (मस्लहा) का इस्तिहसान कहा गया है, वह कोई शरई दलील (दलीलِ शरई) नहीं है, बल्कि वह शरई दलील को छोड़ देने और उस चीज़ को अपनाने का नाम है जिसे अक़्ल (बुद्धि) मस्लहत या ज़रूरत समझती है।