भाषा (अल-लुग़ah)
The Language (al-lughah)
भाषा शब्दों (अल्फ़ाज़) की वह अभिव्यक्ति है जो अर्थों के लिए स्थापित और निर्धारित किए गए हैं।
The language is an expression of Alfaazh (wordings) that have been provided and set for meanings.
भाषा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका और कार्य यह है कि वह लोगों के बीच समझ साझा करने का साधन हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि इंसान, अपनी प्रकृति से, अपनी ही जाति के लोगों के साथ रहने की आवश्यकता रखता है। अतः उनके लिए कोई ऐसा साधन होना ज़रूरी है जिससे वे एक-दूसरे को समझ सकें, ताकि वे मिलकर सहयोग करें और जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान कर सकें।
The most important role and function of the language is for it to be a means for sharing understanding amongst the people. That is because the human, by his nature, needs to live with others of his kind. There therefore needs to be a means for them to be able to understand one another for the purpose and sake of cooperating and solving the problems that they encounter in life.
भाषा एक ऐसी चीज़ है जिसे लोगों ने उपलब्ध कराया और निर्धारित किया है (यानी यह मनुष्य-निर्मित या गढ़ी हुई है)। इसलिए यह इस्तिलाही (परंपरागत) है, जिसका अर्थ है कि यह लोगों के एक समूह के बीच इस बात पर सहमति है कि किसी विशेष अर्थ को दर्शाने के लिए कुछ विशेष शब्द-रचनाएँ रखी और तय की जाएँ। इसके अल्फ़ाज़ (शब्द-रचनाएँ) उन हुरूफ़ (अक्षरों) से बनते और गढ़े जाते हैं जो हवा के मुँह, जीभ और गले की हरकतों से मिलने पर उत्पन्न होने वाली मानवीय ध्वनि से निकलते हैं। इन अल्फ़ाज़ के द्वारा व्यक्ति चीज़ों और कार्यों की मानसिक तस्वीरों के रूप में अपने भीतर जो कुछ है उसे व्यक्त कर सकता है। कोई व्यक्ति किसी चीज़ को दूर से देखकर उसे पत्थर का लफ़्ज़ (शब्द) दे सकता है। फिर जब वह उसके और नज़दीक जाता है तो उसे पेड़ समझने लगता है और उस पर पेड़ का नाम रख देता है। फिर जब वह और नज़दीक पहुँचता है तो पाता है कि वह एक इंसान है, और तब वह उसे इंसान के लफ़्ज़ से पुकारता है। इससे साबित होता है कि उस चीज़ का बाहरी अर्थ लफ़्ज़ बदलने के साथ नहीं बदला, बल्कि बदली केवल वह मानसिक तस्वीर जो व्यक्ति ने अपने दिमाग़ में बनाई थी। नतीजतन, अल्फ़ाज़ हक़ीक़तों की सच्ची वास्तविकता को क़तई दलालत (निश्चित संकेत) से इंगित नहीं करते। बल्कि वे मन में मौजूद उस वास्तविकता की कल्पनाओं या छवियों को व्यक्त करते हैं। ये शब्द-रचनाएँ उस वास्तविकता की सच्चाई के अनुरूप भी हो सकती हैं, या उसके विपरीत भी।