अहकाम अश-शरइयह को अल-मस्लहह (हित/लाभ) द्वारा मुअल्लल (तर्क-संगत कारण पर आधारित) माने जाने के संबंध में उलेमा के बीच मतभेद
The Difference Or Disagreement Amongst The ‘ulamaa In Respect To The Ahkaam Ash-shar’iyah Being Mu’allalah (reasoned) By Al-maslahah (the Interest/benefit)
उलमा इस विषय में मतभेद रखते थे कि शरई अहकाम मस्लहत के आधार पर मु'अल्लल (तर्कसंगत कारणों पर आधारित) हैं या नहीं, और इस मतभेद के आधार पर वे कई समूहों में बँट गए:
The ‘Ulamaa differed in respect to the Ahkaam Ash-Shar’iyah being Mu’allalah (reasoned) by the Maslahah into a number of groupings:
1 – पहला समूह: इस समूह ने इस बात का इनकार किया कि अहकाम अश-शरइय्या का कारण अल-मस्लहा है, यानी कि मस्लहा शरई हुक्म का उद्देश्य या कारण है। इस मत के अनुसार यह संभव है कि शारेअ (विधायक) ऐसा शरई हुक्म निर्धारित करे जिसमें कोई मस्लहा (हित या लाभ) न हो। इस मत के धारक अश-अशाइरा (अबुल-हसन अल-अशअरी के अनुयायी) और अज़-ज़ाहिरिय्या (दाऊद अज़-ज़ाहिरी के अनुयायी) हैं।