उलेमा की राय: शरअ मिन क़ब्लना के साथ काम करने के संबंध में
The Opinions Of The ‘ulamaa In Respect To Working With Shar’u Min Qablinah
उलेमा के बीच इस विषय में मतभेद है कि शरीअत-ए-कब्लिना (जो पिछली शरीअतें हैं) की हुज्जियत (शरई दलील के रूप में उनकी वैधता) के बारे में क्या हुक्म है, जिनका हमारी शरीअत में बिना इनकार या पुष्टि (समर्थन) के उल्लेख हुआ है। क्या हम उनके द्वारा संबोधित किए जाते हैं या नहीं? इस बारे में उनकी राय इस प्रकार है:
The ‘Ulamaa have differed in respect to the Hujjiyah (legal validity as a source) of the Shar’u Min Qablinaa that has been mentioned in our Share’ah without denial or affirmation (support). Are we addressed by it or not? Their opinions in regards to this are as follows:
1 – अहनाफ़ के अधिकांश विद्वान, मालिकिया और शाफ़िईया के कुछ विद्वान, तथा इमाम अहमद से मनसूब एक मत के अनुसार, यह मानते हैं कि "शरउ मिन क़ब्लिना" (पूर्ववर्ती उम्मतों की शरीअत), जिसका उल्लेख हमारी शरीअत में बिना इनकार (खंडन या फटकार) और बिना तअयीद (समर्थन) के हुआ है, वह हमारे लिए भी शरीअत है और हम उसकी पैरवी करने के पाबंद हैं। अपने इस मत के समर्थन में उन्होंने अल्लाह तआला के इस फ़रमान को प्रमाण बनाया है: