अल-अंबिया (पैगंबर)
Al-Anbiya (The Prophets)
प्रस्तावना
Prologue
मक्का में अवतरित हुई यह सूरह, क़ुरआन के उस काल में अवतरित हुए बाक़ी सभी भागों की तरह, ईमान (आस्था) के विषय से संबंधित है। यह इसे तीन मुख्य शीर्षकों के अंतर्गत प्रस्तुत करती है।
Revealed in Makkah, this sūrah, as with all other parts of the Qur’ān revealed in that period, deals with the issue of faith. It does so under three main headings:
अर्थात्, ईश्वर की एकता, उसका संदेश, और मानवजाति का पुनरुत्थान।
namely, God’s oneness, His message, and mankind’s resurrection.
सूरह का प्रवाह अपने विषय को आगे बढ़ाता है; वह कई महान सार्वभौमिक घटनाओं का उल्लेख करता है और उन्हें ईमान से जोड़ता है। इसका उद्देश्य यह है कि ईमान भी सृष्टि की सार्वभौमिक संरचना का एक हिस्सा है, और वही घटनाएँ उस पर भी लागू होती हैं। यह उस सत्य को स्पष्ट करता है जो आकाशों और धरती के मूल में है और उनकी बनावट का आधार है। यह उस गंभीरता को दर्शाता है जिसके साथ उनके मामले चलाए जाते हैं। यह न खेल-तमाशे की बात है और न झूठ का मामला, जैसे सृष्टि खेल के लिए नहीं बनाई गई, और न उसकी रचना में झूठ का कोई अंश मिलाया गया है: "हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है, खेल के तौर पर नहीं बनाया।" (आयत 16)