अल-शूरा (परामर्श)
Al-Shura (Consultation)
प्रस्तावना
Prologue
जैसे मक्का में उतरी सभी सूरहों में, वैसे ही यह सूरह भी ईमान के विषय पर बात करती है, लेकिन यह विशेष रूप से वह़्यी (ईश्वरीय प्रकाशन) और ईश्वरीय संदेश के प्रश्न पर केंद्रित है। यह सच ही कहा जा सकता है कि यही प्रश्न इस सूरह का मुख्य विषय है, और इसमें उठाए गए सभी बिंदु इसी उद्देश्य की सेवा करते हैं।
Like all the surahs revealed in Makkah, this surah deals with the issue of faith, but it especially focuses on the question of revelation and the Divine message. It can truly be said that this question provides the central theme of the surah and that all points discussed in it serve this purpose.
यह सूरह अल्लाह की एकता की सच्चाई को भी विस्तार से बताती है और उसे अलग-अलग पहलुओं से प्रस्तुत करती है। यह पुनरुत्थान की सच्चाई और उस पर ईमान लाने की आवश्यकता के बारे में भी बात करती है। आख़िरत (परलोक) का ज़िक्र कई स्थानों पर आता है, और उसकी अलग-अलग तस्वीरें पेश की गई हैं। सूरह ईमान वालों के कुछ गुणों और उनके व्यवहार की विशेषता बनने वाले अच्छे आचरण का भी वर्णन करती है। यह इंसान की रोज़ी (जीविका) का भी ज़िक्र करती है कि वह किस तरह कभी बहुतायत में और कभी कम मात्रा में दी जाती है। इसके अलावा, यह इंसान और उसकी उन दो अवस्थाओं के बारे में बताती है जब वह ख़ुशहाली का आनंद लेता है और जब वह कठिनाई में पड़ता है।